उपनिषद्
उपनिषद् हिन्दू धर्म के महत्त्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रन्थ हैं। ये वैदिक वाङ्मय के अभिन्न भाग हैं। ये संस्कृत में लिखे गये हैं।
इनकी संख्या लगभग १०८ है, किन्तु मुख्य उपनिषद १३ हैं। हर एक उपनिषद किसी न किसी वेद से जुड़ा हुआ है।
इनमें परमेश्वर, परमात्मा-ब्रह्म और आत्मा के स्वभाव और सम्बन्ध का बहुत ही दार्शनिक और ज्ञानपूर्वक वर्णन दिया गया है।
उपनिषद् शब्द का साधारण अर्थ है - ‘समीप उपवेशन’ या 'समीप बैठना (ब्रह्म विद्या की प्राप्ति के लिए शिष्य का गुरु के पास बैठना)। यह शब्द ‘उप’, ‘नि’ उपसर्ग तथा, ‘सद्’ धातु से निष्पन्न हुआ है। सद् धातु के तीन अर्थ हैं : विवरण-नाश होना; गति-पाना या जानना तथा अवसादन-शिथिल होना। उपनिषद् में ऋषि और शिष्य के बीच बहुत सुन्दर और गूढ संवाद है जो पाठक को वेद के मर्म तक पहुंचाता है।
मुक्तिकोपनिषद् में एक सौ आठ (१०८) उपनिषदों का वर्णन आता है, इसके अतिरिक्त अडियार लाइब्रेरी मद्रास से प्रकाशित संग्रह में से १७९ उपनिषदों के प्रकाशन हो चुके है। गुजराती प्रिटिंग प्रेस बम्बई से मुदित उपनिषद्-वाक्य-महाकोष में २२३ उपनिषदों की नामावली दी गई है, इनमें उपनिषद (१) उपनिधि-त्स्तुति तथा (२) देव्युपनिषद नं-२ की चर्चा शिवरहस्य नामक ग्रंथ में है लेकिन ये दोनों उपलब्ध नहीं हैं तथा माण्डूक्यकारिका के चार प्रकरण चार जगह गिने गए है इस प्रकार अबतक ज्ञात उपनिषदो की संख्या २२० आती है।
उपनिषद् सूची
- १. ईशावास्योपनिषद् (शुक्लयजर्वेदीय)
- २. अक्षिमालिकौपनिषद् (ऋग्वेदीय)
- ३. अथर्वशिखोपनिषद् (सामवेद)
- ४. अथर्वशिर उपनिषद् (सामवेद)
- ५. अद्वयतारकोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)
- ६. अद्वैतोपनिषद्
- ७. अद्वैतभावनोपनिषद्
- ८. अध्यात्मोपनिषद् (शुक्लयजर्वेदीय)
- ९. अनुभवसारोपनिषद्
- १०. अन्नपुर्णोंपनिषद् (सामवेद)
- ११. अमनस्कोपनिषद्
- १२. अमृतनादोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)
- १३. अमृतबिन्दूपनिषद् (ब्रह्मबिन्दूपनिषद्) (कृष्णयजुर्वेदीय)
- १४. अरुणोपनिषद्
- १५. अल्लोपनिषद
- १६. अवधूतोपनिषद् (वाक्यात्मक एवं पद्यात्मक) (कृष्णयजुर्वेदीय)
- १७. अवधूतोपनिषद् (पद्यात्मक)
- १८. अव्यक्तोपनिषद् (सामवेद)
- १९. आचमनोपनिषद्
- २०. आत्मपूजोपनिषद्
- २१. आत्मप्रबोधनोपनिषद् (आत्मबोधोपनिषद्) (ऋग्वेदीय)
- २२. आत्मोपनिषद् (वाक्यात्मक) (सामवेद)
- २३. आत्मोपनिषद् (पद्यात्मक)
- २४. आथर्वणद्वितीयोपनिषद्
- २५. आयुर्वेदोपनिषद्
- २६. आरुणिकोपनिषद् (आरुणेय्युपनिषद्) (सामवेद)
- २७. आर्षेयोपनिषद्
- २८. आश्रमोपनिषद्
- २९. इतिहासोपनिषद् (वाक्यात्मक एवं पद्यात्मक)
- ३०. ईसावास्योपनिषद
- ००. उपनषत्स्तुति (शिव रहस्यान्तर्गत, अभी तक अनुपलब्ध है।)
- ३१. ऊध्वर्पण्ड्रोपनिषद् (वाक्यात्मक एवं पद्यात्मक)
- ३२. एकाक्षरोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)
- ३३. ऐतेरेयोपनिषद् (अध्यायात्मक) (ऋग्वेदीय)
- ३४. ऐतेरेयोपनिषद् (खन्ड़ात्मक)
- ३५. ऐतेरेयोपनिषद् (अध्यायात्मक)
- ३६. कठरुद्रोपनिषद् (कण्ठोपनिषद्) (कृष्णयजुर्वेदीय)
- ३७. कठोपनिषद्
- ३८. कठश्रुत्युपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)
- ३९. कलिसन्तरणोपनिषद् (हरिनामोपनिषद्) (कृष्णयजुर्वेदीय)
- ४०. कात्यायनोपनिषद्
- ४१. कामराजकीलितोद्धारोपनिषद्
- ४२. कालाग्निरुद्रोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)
- ४३. कालिकोपनिषद्
- ४४. कालिमेधादीक्षितोपनिषद्
- ४५. कुण्डिकोपनिषद् (सामवेद)
- ४६. कृष्णोपनिषद् (सामवेद)
- ४७. केनोपनिषद् (सामवेद)
- ४८. कैवल्योपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)
- ४९. कौलोपनिषद्
- ५०. कौषीतकिब्राह्मणोपनिषद् (ऋग्वेदीय)
- ५१. क्षुरिकोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)
- ५२. गणपत्यथर्वशीर्षोपनिषद् (सामवेद)
- ५३. गणेशपूर्वतापिन्युपनिषद् (वरदपूर्वतापिन्युपनिषद्)
- ५४. गणेशोत्तरतापिन्युपनिषद् (वरदोत्तरतापिन्युपनिषद्)
- ५५. गर्भोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)
- ५६. गान्धर्वोपनिषद्
- ५७. गायत्र्युपनिषद्
- ५८. गायत्रीरहस्योपनिषद्
- ५९. गारुड़ोपनिषद् (वाक्यात्मक एवं मन्त्रात्मक) (सामवेद)
- ६०. गुह्यकाल्युपनिषद्
- ६१. गुह्यषोढ़ान्यासोपनिषद्
- ६२. गोपालपूर्वतापिन्युपनिषद् (सामवेद)
- ६३. गोपालोत्तरतापिन्युपनिषद्
- ६४. गोपीचन्दनोपनिषद्
- ६५. चतुर्वेदोपनिषद्
- ६६. चाक्षुषोपनिषद् (चक्षरुपनिषद्, चक्षुरोगोपनिषद्, नेत्रोपनिषद्)
- ६७. चित्त्युपनिषद्
- ६८. छागलेयोपनिषद्
- ६९. छान्दोग्योपनिषद् (सामवेद)
- ७०. जाबालदर्शनोपनिषद् (सामवेद)
- ७१. जाबालोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)
- ७२. जाबाल्युपनिषद् (सामवेद)
- ७३. तारसारोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)
- ७४. तारोपनिषद्
- ७५. तुरीयातीतोपनिषद् (तीतावधूतो०) (शुक्लयजुर्वेदीय)
- ७६. तुरीयोपनिषद्
- ७७. तुलस्युपनिषद्
- ७८. तेजोबिन्दुपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)
- ७९. तैत्तरीयोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)
- ८०. त्रिपादविभूतिमहानारायणोपनिषद् (सामवेद)
- ८१. त्रिपुरातापिन्युपनिषद् (सामवेद)
- ८२. त्रिपुरोपनिषद् (ऋग्वेदीय)
- ८३. त्रिपुरामहोपनिषद्
- ८४. त्रिशिखिब्राह्मणोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)
- ८५. त्रिसुपर्णोपनिषद्
- ८६. दक्षिणामूर्त्युपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)
- ८७. दत्तात्रेयोपनिषद् (सामवेद)
- ८८. दत्तोपनिषद्
- ८९. दुर्वासोपनिषद्
- ९०. (१) देव्युपनिषद् (पद्यात्मक एवं मन्त्रात्मक) (सामवेद) * (२) देव्युपनिषद् (शिवरहस्यान्तर्गत. अनुपलब्ध)
- ९१. द्वयोपनिषद्
- ९२. ध्यानबिन्दुपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)
- ९३. नादबिन्दुपनिषद् (ऋग्वेदीय)
- ९४. नारदपरिब्राजकोपनिषद् (सामवेद)
- ९५. नारदोपनिषद्
- ९६. नारायणपूर्वतापिन्युपनिषद्
- ९७. नारायणोत्तरतापिन्युपनिषद्
- ९८. नारायणोपनिषद् (नारायणाथर्वशीर्ष) (कृष्णयजुर्वेदीय)
- ९९. निरालम्बोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)
- १००. निरुक्तोपनिषद्
- १०१. निर्वाणोपनिषद् (ऋग्वेदीय)
- १०२. नीलरुद्रोपनिषद्
- १०३. नृसिंहपूर्वतापिन्युपनिषद्
- १०४. नृसिंहषटचक्रोपनिषद्
- १०५. नृसिंहोत्तरतापिन्युपनिषद् (सामवेद)
- १०६. पंचब्रह्मोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)
- १०७. परब्रह्मोपनिषद् (सामवेद)
- १०८. परमहंसपरिब्राजकोपनिषद् (सामवेद)
- १०९. परमहंसोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)
- ११०. पारमात्मिकोपनिषद्
- १११. पारायणोपनिषद्
- ११२. पाशुपतब्राह्मोपनिषद् (सामवेद)
- ११३. पिण्डोपनिषद्
- ११४. पीताम्बरोपनिषद्
- ११५. पुरुषसूक्तोपनिषद्
- ११६. पैंगलोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)
- ११७. प्रणवोपनिषद् (पद्यात्मक)
- ११८. प्रणवोपनिषद् (वाक्यात्मक
- ११९. प्रश्नोपनिषद् (सामवेद)
- १२०. प्राणाग्निहोत्रोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)
- १२१. बटुकोपनिषद (बटुकोपनिषध)
- १२२. ब्रह्वृचोपोपनिषद् (ऋग्वेदीय)
- १२३. बाष्कलमन्त्रोपनिषद्
- १२४. बिल्वोपनिषद् (पद्यात्मक)
- १२५. बिल्वोपनिषद् (वाक्यात्मक)
- १२६. बृहज्जाबालोपनिषद् (सामवेद)
- १२७. बृहदारण्यकोपनिषद् (शुक्लयजर्वेदीय)
- १२८. ब्रह्मविद्योपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)
- १२९. ब्रह्मोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)
- १३०. भगवद्गीतोपनिषद्
- १३१. भवसंतरणोपनिषद्
- १३२. भस्मजाबालोपनिषद् (सामवेद)
- १३३. भावनोपनिषद् (कापिलोपनिषद्) (सामवेद)
- १३४. भिक्षुकोपनिष (शुक्लयजुर्वेदीय)
- १३५. मठाम्नयोपनिषद्
- १३६. मण्डलब्राह्मणोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)
- १३७. मन्त्रिकोपनिषद् (चूलिकोपनिषद्) (शुक्लयजुर्वेदीय)
- १३८. मल्लायुपनिषद्
- १३९. महानारायणोपनिषद् (बृहन्नारायणोपनिषद्, उत्तरनारायणोपनिषद्)
- १४०. महावाक्योपनिषद्
- १४१. महोपनिषद् (सामवेद)
- १४२. माण्डूक्योपनिषद् (सामवेद)
- १४३. माण्डुक्योपनिषत्कारिका